
उन्नाव के चर्चित दुष्कर्म मामले ने एक बार फिर देश की कानून व्यवस्था पर कठोर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोषी विधायक कुलदीप सेंगर भले ही जेल में हो, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि उसका रसूख आज भी सलाखों से बाहर ज़िंदा है।
दिल्ली के वसंत कुंज थाने के बाहर बैठी पीड़िता की आंखों में डर नहीं, बल्कि सिस्टम से थकी हुई उम्मीद दिखती है।
यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ न्याय की मांग नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जहां सजा एक व्यक्ति को मिलती है, लेकिन सज़ा भुगतती पूरी जिंदगी पीड़िता है।
Aishwarya Sengar को सीधा संदेश: “तुम पिता के लिए, मैं ज़िंदगी के लिए लड़ रही हूं”
पीड़िता ने कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर को नाम लेकर संबोधित करते हुए कहा— “तुम कहती हो कि आठ साल से पिता के लिए भटक रही हो, लेकिन क्या तुमने मेरी वो रातें देखी हैं— जहां इंसाफ सिर्फ एक फाइल नंबर बन गया था?”
पीड़िता ने याद दिलाया कि एफआईआर तक दर्ज कराने में एक साल से ज्यादा लगा, और वो भी तब जब उसके पिता की निर्मम हत्या हो चुकी थी। यह बयान भावनात्मक नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली पर चार्जशीट है।
Mental Harassment का आरोप: तस्वीरें वायरल, धमकियां जारी
पीड़िता का आरोप है कि— उसकी तस्वीरें सार्वजनिक की गईं, जो कानूनन गंभीर अपराध है। उसे लगातार पत्र और धमकियां भेजी जा रही हैं। कुलदीप सेंगर के समर्थक उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सवाल यही है— जब दोषी जेल में है, तो डर आज़ाद कैसे है?
आत्महत्या की चेतावनी: सिस्टम के लिए आख़िरी अलार्म?
पीड़िता ने बेहद गंभीर चेतावनी दी— “अगर यही टॉर्चर चलता रहा, तो मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।”
यह बयान कोई भावनात्मक ड्रामा नहीं, बल्कि राज्य और पुलिस के लिए SOS कॉल है। देश में हेल्पलाइन बहुत हैं, लेकिन मदद अभी भी ‘वेटिंग मोड’ में है।

बच्चों को बनाया जा रहा निशाना
अब इस लड़ाई में पीड़िता का वैवाहिक जीवन भी घसीटा जा रहा है। उसने सवाल उठाया— क्या शादी करना गुनाह है? क्या रेप पीड़िता को “नॉर्मल लाइफ” का हक नहीं?
पति के खिलाफ की जा रही अभद्र टिप्पणियों ने पीड़िता को भीतर तक तोड़ दिया है। उसकी चिंता साफ है—अगर पति टूट गया, तो दो बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?
Delhi Police की परीक्षा की घड़ी
पीड़िता यूपी से दिल्ली सिर्फ इसलिए आई थी ताकि सुरक्षित रह सके, लेकिन अब दिल्ली में भी उसे चैन नहीं। दिल्ली पुलिस जांच कर रही है—तस्वीरें वायरल करने वाले कौन हैं? धमकियों के पीछे कौन लोग हैं?
देश देख रहा है कि कानून सिर्फ कागज़ पर सख़्त है या ज़मीन पर भी?
तीखा लेकिन सच्चा
यह मामला सिर्फ उन्नाव की बेटी का नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है जहां— दोषी को सज़ा मिल जाती है, लेकिन पीड़िता को सुरक्षा नहीं।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि संविधान की असफलता मानी जाएगी।
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